Sunday, May 17, 2009

jhulfe

वो कोन है जो चला जा रहा है
दूर जा कर भी पास आ रहा है
देखा था उसे २ साल पहले
मगर आज भी अनजान नज़र आ रहा है

काला चस्मा लगाए
बाल लहरा रहा था
देखो वो झुल्फी
भाव खा रहा था

उनकी झुल्फो मैं खोए
हम रुक ना पाए
और अपने बालों पर रोज़ नए- नए शैंपू लगाये
उसके बाल तो भाढे जा रहे थे
मगर जाने क्यूँ
हमारे झडे जा रहे थे

बालों को तो हमने
जाने केसे संभाला
मगर बाकि तो हम मरे जा रह थे

इतने मैं आया भूरे बालों का जमाना
उसके साथ साथ हमने भी कलर लगाने का ठाना
मगर भूरे बालो को भूरी रंगत ना भाई
बीना बात मैं जेब कटवाई

शैंपू का कहर तो वो सह चुके थे
रंग के बाद तो
बाल मेरे अब २-४ ही रह चुके थे .......

4 comments:

  1. pichle waale comment ko kuch zyada seriously nahi le liya ... :O

    sach mein gande maarne lagi tu to !! :D

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  2. mazaa aa gayaa padh kar !

    aapkaa swaagat hai !

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  3. awesome!!
    oye u have hidden talent...abhi tk kahan thi??
    srzly mast thi...pj ki barsaat ..chaatu..gud..lage raho!!

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  4. हुज़ूर आपका भी .......एहतिराम करता चलूं .....
    इधर से गुज़रा था- सोचा- सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

    कृपया एक अत्यंत-आवश्यक समसामयिक व्यंग्य को पूरा करने में मेरी मदद करें। मेरा पता है:-
    www.samwaadghar.blogspot.com
    शुभकामनाओं सहित
    संजय ग्रोवर

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